शुक्रवार, 26 जून 2026

डायरी का एक कोरा पन्ना

 डायरी का एक कोरा पन्ना हमेशा के लिए ख़ाली रह गया

अधूरी बातों संग यादों का सिलसिला आज भी ज़ारी है, 


पन्ने पलट कर पूछते हैं, पन्ने का ख़ाली होने का सबब

क्या कहूँ कि ज़िंदगी की कश्मकश में मुश्क़िलें बाक़ी हैं, 


सोचा था तुम्हारी मोहब्बत से पन्ने को बाखूबी सजायेंगे

चाहत के चंद अल्फ़ाज़ लिखना, सनम अभी बाक़ी है, 


पूरी न हो सकेगी अधूरी चाहत को पाने की कोशिश मेरी

इश्क़ की चाहत लिए, ख़्यालों में भटकना मेरा ज़ारी है, 


दिन रात एक यही रोग, न मरने दे और न कहीं जीने दे

तुम्हें पा लेने की, नाक़ाम कोशिश मेरी, अभी ज़ारी है, 


काश!कह लेते तुम, चंद लफ़्ज़, उन चंद मुलाक़ातों में

अधूरी ख़्वाहिशों की चाह में, जलना मेरा अभी ज़ारी है, 


दिल के सुलगते ज़ख़्मों, फफोलों को हाथों से सहला दो

जाने कितने नासूरों का, चाहत से भरना अभी बाक़ी है, 


दिल की कलम से उस कोरे पन्ने पर, लिख देते नाम मेरा

तुम्हारे दिल पर अपना नाम, पढ़ना मेरा अभी बाक़ी है.... 

तड़प

 किसी अपने के छोड़कर जाने की बेइंतेहा तड़प

उसकी यादों में हर लम्हा खोये रहने की तलब, 


छोड़ गए इंसान को वापस न पा सकने की तड़प 

रह-रहकर याद आती यादों में खोये रहने की तड़प, 


न मिटी, न मिटा सकने की नाकाम कोशिश है तड़प

लोगों के लिए बनावट, प्यार में मर मिटने की तड़प, 


आख़िरी वक़्त सीने से न लगा पाने की बेहद तड़प

उसके आख़िरी लफ़्ज़ों को, न सुन पाने की तड़प,


आख़िरी हिचकी पर नाम पुकारे जाने की बेबस तड़प

अंतिम साँसों तक एक झलक देख पाने की ललक, 


जिधर देखूँ उधर बेबसी, कभी न खत्म होने वाली तरस

हर ओर तड़प, यादों में बसे रहने की तरसती तड़प, 


तड़पते दिन तड़पती रातें, तरसती आँखें तरसती बाँहें

किसी नाकाम इंसान से पूछो, क्या होती है तड़प..