गुरुवार, 2 जुलाई 2026

तोड़ दिया मेरा अंतर्मन

दुनिया की झूठी रस्मों ने, तोड़ दिया मेरा अंतर्मन

क्या निभाए कैसे निभाए, इसी में फंस गया मन, 


चेहरा एक मुखौटे कई, असली को पहचाने कौन

तन्हा जीवन ही बढ़िया है, तू भी मौन मैं भी मौन, 


ज़माने के रंग ढंग में, अपनी जड़ें संस्कार भूल गए

अपने पराये का भेद बहुत, इंसानियत भी भूल गए, 


इस रंग बदलती दुनिया ने आहत किया मेरा मन

कैसे भूलें, कितना तोड़ा और कुचला गया मेरा मन, 


कोई नहीं अपना यहाँ, परायों जैसे अपने यहाँ

सिर्फ़ मरने पर फूँकने आते, पराये जैसे अपने यहाँ, 


दुःखी हूँ हारी नहीं, गिरगिटों से भरी दुनिया में

बस लगता नहीं मन, रंग बदलती झूठी दुनिया में।


एक बात बोलूँ....

तुम बिन जीने की कोशिश में तुमसे नाराज़ भी हुए

मग़र एक बात बोलूँ, जीना मुश्क़िल है तुम्हारे बिना, 


शायद तुम्हें यकीन न हो लेकिन, यकीन करना मेरा

साँसें अटकती हैं, घुटन होती है यहाँ, तुम्हारे बिना, 


ग़र जाना ही था तो, मुझे भी अपने साथ लेकर जाते

हर तरफ़ अँधेरा और मायूसी फ़ैली है तुम्हारे बिना, 


तुम्हारे सिवा कोई नहीं, कैसे बताएं कितनी बेचैनी 

ज़िंदगी, ज़िंदगी नहीं खुशियाँ बेमानी, तुम्हारे बिना, 


बेशक़ बहारें आयेंगी चमन में, पतझड़ मेरे मन में

गुलशन मुरझाया, मुस्कुराना भूल गए तुम्हारे बिना, 


जाने कितनी बातें कितने एहसास अनकहे रह गये

बेपनाह मोहब्बत तुमसे, कुछ नहीं, तुम्हारे बिना।


चलो एक बार फिर...

चलो, एक बार फ़िर कोशिश करते हैं


हिम्मत हार कर क्यों उदास बैठना 

चलो, एक बार फ़िर कोशिश करें, 


थक कर हार मान लेना सही नहीं

चलो, फ़िर आसमान में उड़ान भरें, 


छिप कर आँसू बहाने से कुछ न होगा

आँसू पोंछ कर, आओ नई राह चलें, 


हम तुम जब साथ हैं तो डरना कैसा

आलस उतार, चलो नई ताज़गी भरें, 


किसका इंतज़ार है, कोई न आयेगा

डरना छोड़ो, आओ नई दिशा चलें, 


काँटों की परवाह क्यों, कुछ न होगा

पत्थरों को रौंद, नया सफ़र तय करें।


मैं जाऊँ तो....

मैं जाऊँ तो रोना मत

चिरनिद्रा में खोने देना, 


रोना नहीं सिर्फ़ मुस्कुराना

सुकून से मुझे सोने देना, 


बहुत थक गई सहते हुए

और न मुझको सहने देना, 


इच्छा नहीं, वापस आने की

खुशनुमा अलविदा कर देना, 


चलते चलते थक गई अब

मुझे आराम करने देना, 


गर सताया अंजाने कभी

रूठना नहीं, बस दुआ देना। 

🙏🙏


एक दिन हम

एक दिन हम फ़िज़ाओं में कहीं खो जायेंगे

बहुत ढूँढ़ोगे मग़र हम तुम्हें कहीं नहीं पायेंगे, 


बिखर जायेंगे हवाओं में, खुशबू की तरह

फिसल जायेंगे हाथों से, तितली की तरह, 


एक दिन सोच कर ज़रूर बहुत पछताओगे

बिछड़ कर हमसे, मन मसोसते रह जाओगे, 


मिट्टी से बना ये चोला, मिट्टी में मिल जायेगा

कुछ नहीं जायेगा संग, सब धरा रह जायेगा, 


रोते बिलखते पुकारते सब पीछे छूट जायेंगे

संगी साथी साथ नहीं, सब यहीं रह जायेंगे, 


समय रहते पुकार लो मन का ग़ुबार निकाल दो

कुछ नहीं घमंड में, द्वेष ईर्ष्या मन से त्याग दो।