गुरुवार, 2 जुलाई 2026

एक दिन हम

एक दिन हम फ़िज़ाओं में कहीं खो जायेंगे

बहुत ढूँढ़ोगे मग़र हम तुम्हें कहीं नहीं पायेंगे, 


बिखर जायेंगे हवाओं में, खुशबू की तरह

फिसल जायेंगे हाथों से, तितली की तरह, 


एक दिन सोच कर ज़रूर बहुत पछताओगे

बिछड़ कर हमसे, मन मसोसते रह जाओगे, 


मिट्टी से बना ये चोला, मिट्टी में मिल जायेगा

कुछ नहीं जायेगा संग, सब धरा रह जायेगा, 


रोते बिलखते पुकारते सब पीछे छूट जायेंगे

संगी साथी साथ नहीं, सब यहीं रह जायेंगे, 


समय रहते पुकार लो मन का ग़ुबार निकाल दो

कुछ नहीं घमंड में, द्वेष ईर्ष्या मन से त्याग दो।


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