शुक्रवार, 3 जुलाई 2026

भूल गई सब

क्या दिन क्या रात, क्या सुबह क्या शाम

कब आये तीज त्योहार, मैं भूल गई सब, 


तेरी यादों में खोई इस क़दर, याद नहीं कुछ

कब बीते पहर दर पहर, मैं भूल गई सब, 


भूली अपनी सुध-बुध, याद तुम्हारी याद मुझे

अपनी कोई फ़िक्र नहीं, ऐसे भूल गई सब, 


कौन मुझे पुकारे, सुनना मुझे अब याद नहीं

कानों में गूँजे तुम्हारी बातें, और भूल गई सब, 


राहों पर नज़र रोक, पदचाप तुम्हारी ढूंढ़ रही

सूनी राहें, उदास मन, ऐसी डूबी भूल गई सब,


तन मिट्टी, मन तुम्हारा, मुझमें मेरा कुछ नहीं

तुमसे मिलने की आस में, बाक़ी भूल गई सब।

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