शुक्रवार, 3 जुलाई 2026

हक़ है मुझे कि

हक़ है मेरा कि तुम्हारे नाम का श्रृंगार करूँ

हर रूप हर रंग का, बहुत सुंदर श्रृंगार करूँ, 


सृष्टि ने सृजन किया, यहाँ तेरे मेरे प्यार का

खुलकर मैंने स्वागत किया, तेरे मेरे प्यार का, 


तुमसे ये पवित्र बंधन, हे प्रिय स्वीकार मुझे

तुम्हारा दिया, हर उपहार है अंगीकार मुझे, 


तुमसे मेरा सिंदूर बिंदिया, चेहरे की चमक

तुम्हारे प्यार से क्यों न आये चेहरे पर दमक, 


तुम्हीं जीवनसाथी हर जनम मुझे मिलना

ये अधूरा रहा, अब थोड़ा जल्दी मिलना।


कोई टिप्पणी नहीं: