हक़ है मेरा कि तुम्हारे नाम का श्रृंगार करूँ
हर रूप हर रंग का, बहुत सुंदर श्रृंगार करूँ,
सृष्टि ने सृजन किया, यहाँ तेरे मेरे प्यार का
खुलकर मैंने स्वागत किया, तेरे मेरे प्यार का,
तुमसे ये पवित्र बंधन, हे प्रिय स्वीकार मुझे
तुम्हारा दिया, हर उपहार है अंगीकार मुझे,
तुमसे मेरा सिंदूर बिंदिया, चेहरे की चमक
तुम्हारे प्यार से क्यों न आये चेहरे पर दमक,
तुम्हीं जीवनसाथी हर जनम मुझे मिलना
ये अधूरा रहा, अब थोड़ा जल्दी मिलना।
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