किसी कोने में बैठ, कुछ आँसू बहा कर
दुःख दर्द भरा मन जब हल्का हो जाता है,
सही कहूँ, किसी से मन खोलना नहीं पड़ता
कष्टों से भरा भारी मन, हल्का हो जाता है,
कह लेने, सुनने की भी बड़ी कीमतें यहाँ पर
काग़ज़ पर उकेरने से, मन हल्का हो जाता है,
कंटीली बातों के घावों से ज़ख़्मी दुःखी मन
लिखने के मरहम से, कुछ हल्का हो जाता है,
मतलब की दुनिया, मतलबी लोग भरे सब ओर
अपने मन को गूढ़ने से, बोझ हल्का हो जाता है,
किससे कहें, कौन सुने, गूँगे बहरों का संसार
अपना ग़म ख़ुद ही सहने से, हल्का हो जाता है,
जब कोई राह दिखाई न दे, कुछ हल भी न सूझे
प्रभु से प्रार्थना करने से, दुःख हल्का हो जाता है।
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें