रविवार, 12 जुलाई 2026

क्यों???

तुम ही से मेरा चाँद खिले


तुम ही से सुबह हो मेरी

तुम ही से चांदनी मिले, 


तुम ही से महके हर कली

तुम ही से मेरी शाम ढले, 


तुम ही तो अपने हो मेरे

तुम ही से हर फूल खिले, 


तुम ही तो चाहत हो मेरी

तुम ही से हैं मेरे सारे गिले, 


तुम ही से ज़िन्दगी है मेरी

तुम ही से मेरा दिल मिले, 


तुम ही से हैं सारे सिलसिले

जब तुम से सब कुछ मिले


फिर क्यों न मुझे तुम मिले?


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