शुक्रवार, 3 जुलाई 2026

हक़ है मुझे कि

हक़ है मेरा कि तुम्हारे नाम का श्रृंगार करूँ

हर रूप हर रंग का, बहुत सुंदर श्रृंगार करूँ, 


सृष्टि ने सृजन किया, यहाँ तेरे मेरे प्यार का

खुलकर मैंने स्वागत किया, तेरे मेरे प्यार का, 


तुमसे ये पवित्र बंधन, हे प्रिय स्वीकार मुझे

तुम्हारा दिया, हर उपहार है अंगीकार मुझे, 


तुमसे मेरा सिंदूर बिंदिया, चेहरे की चमक

तुम्हारे प्यार से क्यों न आये चेहरे पर दमक, 


तुम्हीं जीवनसाथी हर जनम मुझे मिलना

ये अधूरा रहा, अब थोड़ा जल्दी मिलना।


कौन अपना हुआ

दर्द की इंतेहा में यहाँ, कब कौन अपना हुआ

तड़पते पुकारते रहे मग़र कोई अपना न हुआ, 


अपनों को पुकारा, परायों से भी फ़रियाद की

इस बेदर्द ज़मानें में, कहीं कोई अपना न हुआ, 


भरी दुनिया में अपना कहने को कहीं कोई नहीं

किसे याद करें, है कौन यहाँ जो पराया न हुआ, 


लोगों की भीड़ भरी यहाँ तहाँ, जिधर भी देखो

स्वार्थी मतलबी दुनिया में, कोई अपना न हुआ, 


अपनों की चाह यहाँ, उनके बिना जीना व्यर्थ

क्या करें कोई नहीं, कोई भी अपना न हुआ, 


सबके साथ चलना चाहा, दिल से निभाया भी

अफ़सोस, अच्छाई से भी कोई अपना न हुआ, 


छोड़ दिया अब, आस लगाना, उम्मीद करना

किसे सुनाएँ अपने दिल की, कोई अपना न हुआ।


कुछ अधखुले ग़ुलाब

कुछ ग़ुलाब अधखुले, आज भी किताबों में

सूखे मुरझाये, अब भी ख़ुशबू बिखेर रहे हैं, 


कभी दो अजनबी पहली बार यहाँ मिले थे

तेरी मेरी मुलाक़ातों की कहानी कह रहे हैं, 


रोज़ मुस्कुराने का, एक नया बहाना देते हैं

जब भी किताब खोल देखो, कुछ कह रहे हैं, 


प्यार का इज़हार हुआ था कभी, ये कहते हैं

बेपनाह बेमिसाल चाहत की बात कह रहे हैं, 


पंखुड़ियाँ बिखर गयीं फूल से, प्यार वही है

मेरी मोहब्बत को हर रोज़, मुझे सुना रहे हैं।


वो चुभती यादें

तुम्हारे जाने के बाद सोचता हूँ कैसे जी पाऊँगा मैं

तुम्हारी हर बात यादें बन हर लम्हा बहुत सताती है, 


साथ जीने साथ मरने की कसमें खाईं थी हमने

मग़र अकेलापन, तुम्हारी यादें मुझे बहुत सताती हैं, 


वापस न आओगी तुम, ये जानता हूँ मैं भी मग़र

दिल को तुम्हारी मुस्कुराहट, याद आ बहुत सताती है, 


दिल धड़कना तुम्हारे जाने के बाद अब भूल गया है

आने की उम्मीद जाग कर, मुझे बहुत सताती है, 


लाख कोशिश करूँ बेशक़, दिन रात आँसू बहाऊँ

न आओगी तुम, ये बात दिल तोड़, बहुत सताती है, 


काश उसी राह पर चलकर, मैं तुम तक पहुँच पाता

अफ़सोस तन्हा जीना होगा, ये बात बहुत सताती है, 


लौट आओ तुम बिन मैं, तन्हा बेचैन जी न पाऊँगा

वो चुभती यादें अक्सर याद आ, बहुत सताती हैं।


भूल गई सब

क्या दिन क्या रात, क्या सुबह क्या शाम

कब आये तीज त्योहार, मैं भूल गई सब, 


तेरी यादों में खोई इस क़दर, याद नहीं कुछ

कब बीते पहर दर पहर, मैं भूल गई सब, 


भूली अपनी सुध-बुध, याद तुम्हारी याद मुझे

अपनी कोई फ़िक्र नहीं, ऐसे भूल गई सब, 


कौन मुझे पुकारे, सुनना मुझे अब याद नहीं

कानों में गूँजे तुम्हारी बातें, और भूल गई सब, 


राहों पर नज़र रोक, पदचाप तुम्हारी ढूंढ़ रही

सूनी राहें, उदास मन, ऐसी डूबी भूल गई सब,


तन मिट्टी, मन तुम्हारा, मुझमें मेरा कुछ नहीं

तुमसे मिलने की आस में, बाक़ी भूल गई सब।

गुरुवार, 2 जुलाई 2026

तोड़ दिया मेरा अंतर्मन

दुनिया की झूठी रस्मों ने, तोड़ दिया मेरा अंतर्मन

क्या निभाए कैसे निभाए, इसी में फंस गया मन, 


चेहरा एक मुखौटे कई, असली को पहचाने कौन

तन्हा जीवन ही बढ़िया है, तू भी मौन मैं भी मौन, 


ज़माने के रंग ढंग में, अपनी जड़ें संस्कार भूल गए

अपने पराये का भेद बहुत, इंसानियत भी भूल गए, 


इस रंग बदलती दुनिया ने आहत किया मेरा मन

कैसे भूलें, कितना तोड़ा और कुचला गया मेरा मन, 


कोई नहीं अपना यहाँ, परायों जैसे अपने यहाँ

सिर्फ़ मरने पर फूँकने आते, पराये जैसे अपने यहाँ, 


दुःखी हूँ हारी नहीं, गिरगिटों से भरी दुनिया में

बस लगता नहीं मन, रंग बदलती झूठी दुनिया में।


एक बात बोलूँ....

तुम बिन जीने की कोशिश में तुमसे नाराज़ भी हुए

मग़र एक बात बोलूँ, जीना मुश्क़िल है तुम्हारे बिना, 


शायद तुम्हें यकीन न हो लेकिन, यकीन करना मेरा

साँसें अटकती हैं, घुटन होती है यहाँ, तुम्हारे बिना, 


ग़र जाना ही था तो, मुझे भी अपने साथ लेकर जाते

हर तरफ़ अँधेरा और मायूसी फ़ैली है तुम्हारे बिना, 


तुम्हारे सिवा कोई नहीं, कैसे बताएं कितनी बेचैनी 

ज़िंदगी, ज़िंदगी नहीं खुशियाँ बेमानी, तुम्हारे बिना, 


बेशक़ बहारें आयेंगी चमन में, पतझड़ मेरे मन में

गुलशन मुरझाया, मुस्कुराना भूल गए तुम्हारे बिना, 


जाने कितनी बातें कितने एहसास अनकहे रह गये

बेपनाह मोहब्बत तुमसे, कुछ नहीं, तुम्हारे बिना।


चलो एक बार फिर...

चलो, एक बार फ़िर कोशिश करते हैं


हिम्मत हार कर क्यों उदास बैठना 

चलो, एक बार फ़िर कोशिश करें, 


थक कर हार मान लेना सही नहीं

चलो, फ़िर आसमान में उड़ान भरें, 


छिप कर आँसू बहाने से कुछ न होगा

आँसू पोंछ कर, आओ नई राह चलें, 


हम तुम जब साथ हैं तो डरना कैसा

आलस उतार, चलो नई ताज़गी भरें, 


किसका इंतज़ार है, कोई न आयेगा

डरना छोड़ो, आओ नई दिशा चलें, 


काँटों की परवाह क्यों, कुछ न होगा

पत्थरों को रौंद, नया सफ़र तय करें।


मैं जाऊँ तो....

मैं जाऊँ तो रोना मत

चिरनिद्रा में खोने देना, 


रोना नहीं सिर्फ़ मुस्कुराना

सुकून से मुझे सोने देना, 


बहुत थक गई सहते हुए

और न मुझको सहने देना, 


इच्छा नहीं, वापस आने की

खुशनुमा अलविदा कर देना, 


चलते चलते थक गई अब

मुझे आराम करने देना, 


गर सताया अंजाने कभी

रूठना नहीं, बस दुआ देना। 

🙏🙏


एक दिन हम

एक दिन हम फ़िज़ाओं में कहीं खो जायेंगे

बहुत ढूँढ़ोगे मग़र हम तुम्हें कहीं नहीं पायेंगे, 


बिखर जायेंगे हवाओं में, खुशबू की तरह

फिसल जायेंगे हाथों से, तितली की तरह, 


एक दिन सोच कर ज़रूर बहुत पछताओगे

बिछड़ कर हमसे, मन मसोसते रह जाओगे, 


मिट्टी से बना ये चोला, मिट्टी में मिल जायेगा

कुछ नहीं जायेगा संग, सब धरा रह जायेगा, 


रोते बिलखते पुकारते सब पीछे छूट जायेंगे

संगी साथी साथ नहीं, सब यहीं रह जायेंगे, 


समय रहते पुकार लो मन का ग़ुबार निकाल दो

कुछ नहीं घमंड में, द्वेष ईर्ष्या मन से त्याग दो।


शुक्रवार, 26 जून 2026

डायरी का एक कोरा पन्ना

 डायरी का एक कोरा पन्ना हमेशा के लिए ख़ाली रह गया

अधूरी बातों संग यादों का सिलसिला आज भी ज़ारी है, 


पन्ने पलट कर पूछते हैं, पन्ने का ख़ाली होने का सबब

क्या कहूँ कि ज़िंदगी की कश्मकश में मुश्क़िलें बाक़ी हैं, 


सोचा था तुम्हारी मोहब्बत से पन्ने को बाखूबी सजायेंगे

चाहत के चंद अल्फ़ाज़ लिखना, सनम अभी बाक़ी है, 


पूरी न हो सकेगी अधूरी चाहत को पाने की कोशिश मेरी

इश्क़ की चाहत लिए, ख़्यालों में भटकना मेरा ज़ारी है, 


दिन रात एक यही रोग, न मरने दे और न कहीं जीने दे

तुम्हें पा लेने की, नाक़ाम कोशिश मेरी, अभी ज़ारी है, 


काश!कह लेते तुम, चंद लफ़्ज़, उन चंद मुलाक़ातों में

अधूरी ख़्वाहिशों की चाह में, जलना मेरा अभी ज़ारी है, 


दिल के सुलगते ज़ख़्मों, फफोलों को हाथों से सहला दो

जाने कितने नासूरों का, चाहत से भरना अभी बाक़ी है, 


दिल की कलम से उस कोरे पन्ने पर, लिख देते नाम मेरा

तुम्हारे दिल पर अपना नाम, पढ़ना मेरा अभी बाक़ी है.... 

तड़प

 किसी अपने के छोड़कर जाने की बेइंतेहा तड़प

उसकी यादों में हर लम्हा खोये रहने की तलब, 


छोड़ गए इंसान को वापस न पा सकने की तड़प 

रह-रहकर याद आती यादों में खोये रहने की तड़प, 


न मिटी, न मिटा सकने की नाकाम कोशिश है तड़प

लोगों के लिए बनावट, प्यार में मर मिटने की तड़प, 


आख़िरी वक़्त सीने से न लगा पाने की बेहद तड़प

उसके आख़िरी लफ़्ज़ों को, न सुन पाने की तड़प,


आख़िरी हिचकी पर नाम पुकारे जाने की बेबस तड़प

अंतिम साँसों तक एक झलक देख पाने की ललक, 


जिधर देखूँ उधर बेबसी, कभी न खत्म होने वाली तरस

हर ओर तड़प, यादों में बसे रहने की तरसती तड़प, 


तड़पते दिन तड़पती रातें, तरसती आँखें तरसती बाँहें

किसी नाकाम इंसान से पूछो, क्या होती है तड़प..

सोमवार, 24 जनवरी 2022

" ख़ामोशी ओढ़ ली "

कभी कभी ख़ामोशी ओढ़ लेना अच्छा होता है

शिकायत करें भी तो किस से, कोई नहीं सुनता है


डूब गए बीच भँवर में हम करके तुमसे प्यार

दिखा कर स्वप्न सलोने तुम हो गए इक बयार


हृदय की पीड़ा, विरह का दर्द, एक टूटा दिल ही जाने

बाक़ी किसी को फ़िक्र नहीं, रहते बन संग सब अंजाने


हृदय की खामोश चीखें कौन सुने किसे दिखाएँ

दर्द अनंत असीम सीमाओं के पार, कैसे बहलाएं


ख़ामोश निग़ाहें देखती हैं पूछती अब कुछ नहीं

एक ख़ामोशी ओढ़ ली उसने कहती अब कुछ नहीं


" रुकना तेरा काम नहीं, चलना तेरी शान "

माना कि रात काली है, मग़र अनगिनत सितारों वाली है

ढलने वाली है रात, क्योंकि सूरज की बारी आनेवाली है


माना कि रास्ते कठिन हैं मग़र मंज़िल आने वाली है

निराश ना हो परेशान ना हो, सफलता मिलने वाली है


परीक्षा की घड़ी बहुत सख़्त और मंज़िल बेहद करीब है

हौसला और हिम्मत सबकी जेब है, नहीं कोई ग़रीब है


सफ़र लंबा और राह विषम, तुम्हें कभी घबराना नहीं है

चलते रहो राह निरंतर धीरे ही सही, लड़खड़ाना नहीं है


ये रात अंधेरी है मगर जुगनुओं वाली है, डरना नहीं है

इस छोटी रोशनी में तुझे चलते रहना है, रुकना नहीं है


" अधूरी ख्वाहिशें "

अधूरी ख्वाहिशें लेकर कौन जीना चाहता है

मग़र अधूरी ख्वाहिशें लेकर हर कोई जी रहा है


ये अधूरापन ना जीने देता है ना मरने देता है

कैसे बयाँ करें, दिल में एक हुजूम सा उठता है


अधूरी कसक से अक्सर दिल कराह उठता है

ना चैन कहीं ये पाता है, बस बेचैन ही रहता है


दिल दिमाग़ में अधूरेपन को हर कोई ढो रहा है

ना बता पा रहा है ना ख़ुशी से चल पा रहा है