रविवार, 19 अप्रैल 2009

आए नज़र बस तू...

मौसम मौसम तेरी चाहत का सन्देसा हे,
आहट आहट तेरे आने का अन्देसा हे,
हर खुशबू से आती हे अब तेरी ही खुशबू,
मंज़र मंज़र आलम आलम आए नज़र बस तू...
आती जाती सांसों में हे दर्द भरी हलचल,
कटे से नहीं कटता हे ये तन्हाई का पल,
पागल पागल रहती हे मेरी तो हर धड़कन,
बस तेरे दीदार का छाया मुझपर पागलपन...

कोई टिप्पणी नहीं: