शुक्रवार, 25 जून 2021

आस

कैसे कह दूँ कि आज भी तुमसे प्यार नहीं है, 

इन आँखों को अब भी तुम्हारा इंतज़ार नहीं है l

बँधी हूँ तुमसे तो बन्धन हमेशा रहेगा, 

प्यार है तुमसे तो संग भी सदा रहेगा l

साक्षात् में तुम मेरे पास नहीं, 

पर आत्मा से तुम कभी अलग नहीं l

अंश है तुम्हारा मेरे पास, 

फिर क्यों ना होगी तुमसे मिलन की आस l

तुम बिन उदासी है हर तरफ इधर, 

इक उम्मीद दिखती है देखती हूँ मुड़कर जिधर l

दिख जाए शायद कहीं तुम्हारी एक झलक, 

नहीं पाती जब तुम्हें कहीं, बैठ जाती हूँ इक तरफ l

जन्मों का पता नहीं, इस जन्म का संग था हमारा, 

मैंने चाहा, पर तुमने कभी ना समझना चाहा l

अपना घोंसला छोड़ कर चिड़िया कब आबाद हुई है, 

खुले आसमां के नीचे वो हरपल बरबाद हुई है l

अपनी खुशियाँ वह घोंसले में ही पाती है, 

जहाँ दुखी होने पर भी वह खुशी के गीत गाती है l

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